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आखिर हिन्दू धर्म में फ़क़ीर साईं की पूजा बढ़ाने का दोषी कौन ? स्वयं हिन्दू या हिन्दू धर्म के मठाधीश ?

आखिर हिन्दू धर्म में फ़कीर साईं की पूजा बढ़ने का दोषी कौन ? स्वयं हिन्दू या हिन्दू धर्म के मठाधीश बड़ाM विचित्र प्रश्न है कि आखिर हिन्दुओ का झुकाव एक फ़क़ीर की तरफ क्यों हुआ ? क्या हमारा धर्म और ज्ञान इतना कमजोर था कि हम भावना में बह गए या हमारे मठाधीसों ने अपने कर्म का पालन ठीक से नहीं किया था .या वो अपने कर्म से विमुक्त हो गए थे . क्या वो सोते रहे .या उनमे साहस नहीं था कि हिन्दू लोगो में जागरण पैदा किया जाए . यह सनातन का दुर्भाग्य ही था कि मुल्ला साईं जैसे नाम का जिन्ह बड़ा होता गया और हिन्दू धर्म को निगलता गया . अब उस साईं नाम के जिन्ह का आकार महाभारत के योद्धा घतोत्कक्ष के सामान बड़ा हो गया है उसको गिराने के लिए एक अवतार की जरुरत होगी ऐसे साईं रूपी जिन्ह को मारने के लिए दिव्यास्त्र … [ Read More ]

सृष्टि के आरम्भ में ज्ञान कहा सेआया ? ये कहां संचित रहता है ?क्या है इसका वैज्ञानिक कारण ?

श्रष्टि के आरंभ मे ज्ञान कहाँ से आया था ? क्या है वैज्ञानिक कारण ? यह प्रश्न सोचने पर मजबूर करता है कि श्रष्टि के आरंभ मे ज्ञान कहाँ से आया था ? और कहाँ संचित रहता है ? ज्ञान और आत्मा का गहरा संबन्ध है । जब प्रलय काल आता है तब कुछ महान लोगो की आत्मा ऐसे होती है जिनको मोक्ष प्राप्त नहीं होता है । तथा उनके उच्च कर्म होते है । वे आत्मा अपने पूर्व जन्म के कर्मो के आधार पर पुन श्रष्टि के आरंभ मे जन्म लेते है । तथा जो ज्ञान अन्तःकरण मे संचित होता है वही ज्ञान पुन जाग्रत हो जाता है । इसको आप एक वैज्ञानिक उदाहरण के माध्यम से समझ सकते हो । जैसे बिजली के तारों मे बिजली दोड़ रही होती है और उसमे बहुत ऊर्जा होती है , उस ऊर्जा से नाना प्रकार के उपकरणो के माध्यम से ज्ञान … [ Read More ]

क्या योग से सभी लोकों पर भ्रमण किया जा सकता है ? क्या है योग का वैज्ञानिक आधार ?

योग का विज्ञान हमारे ऋषियों ने बहुत पहले खोज लिया था । योग विज्ञान से भौतिक विज्ञान का जन्म हुआ था । भौतिक विज्ञान हमे दिखाई देता है । इसलिए मनुष्य भौतिक विज्ञान पर बहुत शीघ्र विश्वास कर लेता है । लेकिन योग विज्ञान दिखाई नहीं देता है इसलिए भौतिक वैज्ञानिक उस पर विश्वास नहीं करता है । कैसे काम करता है योग विज्ञान ? आप इसको एक वैज्ञानिक उदाहरण के माध्यम से समझ सकते हो । अभी हमारे वैज्ञानिको ने एक मंगल यान मंगल लोक पर भेजा है । उस यान का एक यंत्र प्रथवि लोक के हरीकोटा मे स्थित है और एक यंत्र यान के साथ लगा हुआ है । जो प्रथवि लोक का यंत्र है उस यंत्र से मंगल लोक के यान का यंत्र संचालित हो रहा है । मंगल लोक के यान को प्रथवि लोक के वैज्ञानिक संचालित कर रहे है । और मंगल लोक की … [ Read More ]

क्या शरीर भगवान् का एक दिव्य यंत्र है , जिसके द्वारा भगवान् को प्राप्त किया जा सकता है ?

अगर कोई भी साधक भगवान को जानना चाहता है तो उसको सबसे पहले भगवान के द्वारा दिये इस शरीर रूपी यंत्र को जानना जरूरी है । इस शरीर रूपी यंत्र मे भगवान को प्राप्त करने के मार्ग और दिशा मोजूद है । बस साधना से उन रास्ते को जानने की आवश्यकता है । इस शरीर मे मन , बुद्धि , प्राण और आत्मा ये चार ऐसे स्वचालित यंत्र है जो कि रेडियो तरंगो की तरह भिन्न भिन्न लोको से जुड़े रहते है । मन का संबंध प्रथवि लोक के साथ जुड़ा रहता है । बुद्धि का संबंध 136 लोको के जुड़ा रहता है । प्राण का संबंध शरीर के जुड़ा रहता है । और आत्मा का संबंध परमात्मा से जुड़ा रहता है । इन सबके के कार्य अलग अलग है । मन , बुद्धि , प्राण और आत्मा के कार्यो को साधना से समझने की आवश्यकता है । मन के … [ Read More ]

इतना आसान नहीं है मोक्ष को प्राप्त करना ।

हर मनुष्य चाहता है कि उसको मोक्ष मिल जाये । आखिर मोक्ष है क्या ? मोक्ष की धारणा हमारे ऋषियों ने योग समाधि से दो प्रकार की बताई है । पहला मनुष्य का 84 लाख योनियो के बंधन से मुक्त होना या मनुष्य योनि के स्थूल रूपी शरीर से मुक्त होना तथा दूसरा मनुष्य की आत्मा का परम ब्रह्मा मे लीन हो जाना और प्रलय काल के बाद पुनः जन्म लेना । आत्मा के तीन प्रकार के शरीर हमारी आत्मा के तीन प्रकार के शरीर होते है 1- स्थूल शरीर 2- सूक्ष्म शरीर 3- कारण शरीर । जब तक यह आत्मा स्थूल शरीर मे रहती है तब तक आत्मा मन और प्रकृति के साथ संस्कारो से बंधा होता है तथा हम इस संसार के कार्यो मे बंधे रहते है । आत्मा के 136 लोक है स्थूल जगत के 40 लोक , सूक्ष्म जगत के 60 लोक और कारण शरीर के … [ Read More ]

दुख का मूल कारण क्या है ? दुख को कैसे कम करें? क्या है इसका उपाय ?

दुखो के उपाय तो सभी धर्मो मे बताए जाते है । लेकिन यह कोई नहीं बताता है कि दुख क्यो पैदा होता है ? अगर दुख को पैदा न होने दिया जाये तो यह सांसारिक जीवन सहज हो जाएगा और दुख से मुक्ति मिलेगी । भगवान ने इस सृष्टि को दो रूप “जड़ और चेतन “ मे बनाया है । तथा दो शब्दो मे बनाया है “ मन के शब्द और आत्मा के शब्द “ । इसलिए इस दुनिया के दो रूप और दो शब्द होते है । मनुष्य मे भो दो भाव “ इच्छा और संतोष “ रहते है । “इच्छा” हमारी 5 ज्ञानेंद्रियाँ के वशीभूत होकर उसके अधीन काम करती है । जब 5 इंद्री प्रवल होती है तो इच्छा प्रवल होती है । जब इच्छा प्रवल होती है तो शरीर के अंदर एक रासायनिक क्रिया उत्पन्न होती है जो शरीर मे इच्छा को बहुत तीव्र गति देती … [ Read More ]

क्या मनुष्य अपनी योनि का निर्धारण स्वयं कर सकता है ? क्या है इसका वायो वैज्ञानिक रहश्य ?

यह सत्य है कि मनुष्य का जीवन बहुत पुण्य कर्म से मिलता है । मनुष्य की म्रत्यु के समय यह निर्धारित हो जाता है कि मनुष्य कौन सी योनि मे जन्म लेगा । मरते समय आत्मा शरीर के 9 द्वारो मे से किसी एक द्वार से बाहर जाती है । और 10वा द्वार ब्रह्मरंध्र होता है 1- अगर आत्मा लिंग या योनि के रास्ते से बाहर जाता है तो मनुष्य को जन्म उन योनियो मे मिलता है जो जीने और मरने मे लगी रहती है । जो एक दिन मे जन्म भी लेती है और मर भी जाती है । 2- अगर आत्मा गुदा के रास्ते से बाहर जाता है तो ऐसे मनुष्य को नरकीय योनि प्राप्त होती है । नरकीय योनि वो होती है जो हमेशा अंधेरे मे रहती है । उनको कभी सूर्य का प्रकाश नहीं मिलता है । 3- अगर आत्मा मुख के रास्ते से बाहर जाता … [ Read More ]